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September 17, 2026
कोरबा के जनहित के मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठकर काम हो-ज्योत्सना महंत
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कोरबा के जनहित के मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठकर काम हो-ज्योत्सना महंत

Sep 17, 2026

17 सितम्बर को तिलक भवन कोरबा में आयोजित प्रेसवार्ता में सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत ने कहा की प्रथम संसदीय कार्यकाल एवं द्वितीय कार्यकाल में अभी तक अपने निर्वाचन क्षेत्र के विकास एवं समस्याओं के संबंध में निरंतर प्रयास करती रही है ,वह समस्या रेल से संबंधित कोरबा, चिरमिरी, अंबिकापुर, बिलासपुर यात्री सुविधाओं, रेल के ठहराव, रेल के विस्तार, नयी यात्री गाड़ी चलाने के संबंध में हो। उन्होंने लगातार दक्षिण पूर्व मध्य रेल्वे मंडल स्तरीय सांसदों की बैठक एवं लोकसभा के सदन पटल में इस समस्या को उठाकर जनता की मांगो को पूरा करवाने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा की कोरोना काल से बंद पड़ी गाड़ियों को पुनः बहाल करने हेतु अनेको पत्र जी.एम., डी.आर.एम., रेल मंत्री तक को लिखा, परन्तु ऐसा लगता है की रेल अधिकारी, रेल मंत्रालय, रेल बोर्ड कोरबा से कोई भी नयी यात्री गाड़ी देने के पक्ष में नहीं है। रेल्वे को आय का 80 प्रतिशत राजस्व देने के बावजूद जो कोरबा को वाजीब हक देना चाहिए केन्द्र सरकार द्वारा नहीं दिया जा रहा। कोरबा में रेल समस्याएं लगातार बढ़ रही है। उन्होंने सरकार से सीधा सवाल किया कि रेल्वे की प्राथमिकता केवल कोयला परिवहन तक सीमित क्यों दिखाई देती है? यात्री सुविधाओं, यात्री ट्रेनों पर उतना ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा? तीजा, पोरा जैसे महत्वपूर्ण पर्व के दौरान लोकन ट्रेनों को रद्द किया गया इससे हजारों माताओं बहनों को परेशानी हुई। उन्होंने कहा की अगले महीने रेल मंत्री के बिलासपुर आगमन पर कोरबा रेल से संबंधित सभी समस्याओं को प्रमुखता से रखूंगी एवं अगले महीने मंडल स्तरीय सांसदों की बैठक के लिए जो प्रस्ताव मांगे गये थे जो उन्होंने भेजे दिये हैं।

कोरबा जिले में भू-विस्थापितों की गंभीर समस्या पर उन्होंने कहा की हरदीबाजार, अमगांव, चुरैल, पाली, पड़नियां सहित अनेक गांव की जमीन एस.ई.सी.एल. द्वारा ली गई लेकिन मुआवजा, नौकरी, बसाहट देने के नाम पर ग्रामीणों की मांग पर उन्हें लाठियां खानी पड़ी। प्रभावित परिवारों के मकान को बलपूर्वक खाली कराया जा रहा है। एस.ई.सी.एल. नियम विरूद्ध कार्य कर रहा है। किसानों को 15-20 साल गुजर जाने के बाद जमीन ली जा रही है उन्हें वर्तमान दर पर ही मुआवजा दिया जाना चाहिए था, परन्तु नहीं दिया जा रहा है। बसाहट के नाम पर जहां सर्वसुविधायुक्त बसाहट दिया जाना चाहिए था वह भी नहीं दिया जा रहा है। नियमानुसार जब तक बसाहट नहीं दे दिया जाता तब तक किसानों/भू-विस्थापितों के घरों को नहीं तोड़ा जा सकता।

एस.ई.सी.एल. के कर्मचारियों की समस्या पर श्रीमती महंत ने कहा की जो एस.ई.सी.एल के कर्मचारियों मेड़िकल रूप से अनफिट हैं उनके आश्रितों को भी नौकरी नहीं दी जा रही है। विगत कई वर्षों से एस.ई.सी.एल. मेड़िकल बोर्ड की बैठक ही नहीं हुई, जो एस.ई.सी.एल के कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

एस.ई.सी.एल. में बाहर से आई बड़ी-बड़ी ठेका कंपनियों में जहां स्थानीय बेरोजगारों एवं भू-विस्थापित परिवार के व्यक्तियों को रोजगार देना था आउट सोर्सिंग के माध्यम से लिया जा रहा है, जिससे यहां के ग्रामीण आक्रोशित हैं। एस.ई.सी.एल. से संबंधित मांगों को लेकर उनके द्वारा अनेकों बार कोयला मंत्री एवं चेयरमेन अनुराग ठाकुर के समक्ष मीटिंग में यहां की समस्या और जनता की मांगो को प्रमुखता से रखा है ,लेकिन केन्द्र सरकार भू-विस्थापितों की मांगों के प्रति गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा की वे भू-विस्थापितों की लड़ाई में उनके साथ है।

कोरबा के आस-पास के धार्मिक स्थलों को पर्यटन के रूप में विकसित किया जाने की मांग की , जिसमें कनकी, चैतुरगढ़, कुदुरमाल, मड़वारानी, अनुमानगढ़ी, कोसगई, मातीन दाई को पर्यटन स्थल का दर्जा दिलाने कि बात कही ।

उन्होंने कहा की कोरबा में यातायात एक गंभीर समस्या है, जिसको लेकर पूर्व में उनके साथ-साथ अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी सुनालिया अंडर ब्रिज की मांग रखी लेकिन इसके निर्माण में विलंब किया जा रहा है। उन्होंने 16 सितम्बर की बैठक में कलेक्टर से इस दिशा में उचित पहल करने हेतु कहा है। कोरबा में बढ़ता प्रदूषण पर श्रीमती महंत ने चिंता जाहिर की , जिसको लेकर संबंधित मंत्री को पत्र भी लिखा गया। श्रीमती महंत की पहल से दीपका में एक डस्ट रिमूविंग मशीन के द्वारा रोड़ प्रदूषण को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

कोरबा के निरंतर विकास के लिए मेडिकल कॉलेज में स्नातकोत्तर सीट बढ़ाने एवं एम.बी.बी.एस. की सीट बढ़ाने का प्रयास किया जो कि सार्थक रहा। कोरबा के बाद मनेन्द्रगढ़ में मेडिकल कॉलेज की दिशा में रास्ता साफ होना भी महत्वपूर्ण कदम है, उन्होंने कहा की उनके लोकसभा क्षेत्र में तीन जिलों में चिकित्सा शिक्षा का विस्तार हो। गौरेला, पेण्ड्रा, मरवाही में भी मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए लगातार प्रयासरत है जिससे लोगों को उचित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सके।

कोरबा में ई.एस.आई.सी. हॉस्पिटल जो बनाया गया जो मात्र एक रिफर सेंटन बन कर रह गया है। डॉक्टर सहित नर्स स्टाफ एवं अन्य पद खाली हैं ध्यान आकर्षित कराने के बावजूद यहां पर रिक्त पदों पर भर्ती नहीं किया जा रहा है । केन्द्र सरकार को इस पर गंभीर नहीं है।

उन्होंने कहा की कोरबा जिले कि डीएमएफ फंड राशि का उपयोग प्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्रों में ज्यादा किया जाना चाहिए इस विषय में कलेक्टर से चर्चा की है। कोरबा की सड़कों की स्थिति, उपनगरों एवं ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों की स्थिति भी ठीक नहीं है। दिशा समिति की बैठक में कोरबा कलेक्टर से इस विषय में चर्चा हुई, जिसमे उन्होंने सड़कों के सुधार एवं नये निर्माण कार्य जल्द शुरू कराने का निर्णय लिया।

प्रधान मंत्री जी के जन्म दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं लेकिन लोकतंत्र में शुभकामनाओं के साथ सवाल पूछना भी विपक्ष और जनप्रतिनिधियों का अधिकार है। महंगाई, रोजगार, पेट्रोल डीजल की कीमतें, किसानों और आम आदमी की समस्याओं पर भी सरकार को गंभीरता से जवाब देना चाहिए। मेरी शुभकामनाएं अपनी जगह है और जनता के सवाल अपनी जगह।

छत्तीसगढ़ सरकार से भी सीधा सवाल किया की , सरकार के काम काज को लेकर जनता के बीच कई सवाल हैं। सरकार साय-साय चल रही है या नहीं चल रही है इसका जवाब जनता को देना है। सरकार के मंत्री, विधायक और भाजपा के नेता खुद बताऐ कि जमीनी स्तर पर सरकार की योजनाओं और घोषणाओं का कितना असर दिखाई दे रहा है। आम जनता परेशान एवं बेहाल है।

उन्होंने कहा की मैं चाहती हूँ कि कोरबा और पूरे छत्तीसगढ़ के जनहित के मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठकर काम हो।