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September 17, 2026
राष्ट्रीय प्रणवम फेस्टिवल 2026 में गुरु-शिष्य परंपरा की अनूठी तबला जुगलबंदी ने श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध
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राष्ट्रीय प्रणवम फेस्टिवल 2026 में गुरु-शिष्य परंपरा की अनूठी तबला जुगलबंदी ने श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध

Sep 3, 2026

बिलासपुर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगीत महोत्सव “प्रणवम 2026” के मंच पर भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध एवं गौरवशाली गुरु-शिष्य परंपरा का एक अद्भुत और अविस्मरणीय दृश्य देखने को मिला। तबले की अनूठी जुगलबंदी ने सभागार में उपस्थित संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

महोत्सव के दौरान आयोजित विशेष तबला जुगलबंदी में अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त तबला गुरु श्री मोरध्वज वैष्णव ने अपने दो होनहार एवं प्रतिभाशाली शिष्यों पार्थ यादव एवं श्रेयस देवांगन के साथ मंच साझा किया। गुरु और शिष्यों की इस अनूठी प्रस्तुति में ताल, लय, गति एवं तबले के विभिन्न बोलों का अत्यंत सुंदर, प्रभावशाली और रोमांचक संगम देखने को मिला।

तबले की सुमधुर थाप और जटिल लयकारियों के बीच प्रस्तुत संवादात्मक जुगलबंदी ने श्रोताओं को भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहराई, सौंदर्य एवं समृद्ध परंपरा से रूबरू कराया। गुरु के अनुभव, परिपक्वता और मार्गदर्शन के साथ शिष्यों की ऊर्जा, समर्पण एवं प्रतिभा के अद्भुत समन्वय ने इस प्रस्तुति को विशेष बना दिया।

पार्थ यादव एवं श्रेयस देवांगन ने अपने गुरु श्री मोरध्वज वैष्णव के मार्गदर्शन में उत्कृष्ट एवं प्रभावशाली तालबद्ध प्रस्तुति देकर अपनी प्रतिभा का शानदार परिचय दिया। प्रस्तुति के दौरान सभागार में उपस्थित संगीत प्रेमियों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

इस अवसर पर उनकी उत्कृष्ट संगीत साधना एवं प्रेरणादायक योगदान के लिए गुरु श्री मोरध्वज वैष्णव को प्रतिष्ठित “प्रणवम द्रोणाचार्य सम्मान” से सम्मानित किया गया। वहीं उनके दोनों प्रतिभाशाली शिष्यों पार्थ यादव एवं श्रेयस देवांगन को उनकी कला-साधना और उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए “संगीत कलापूर्ण सम्मान” प्रदान कर सम्मानित किया गया।

“प्रणवम 2026” के मंच पर प्रस्तुत यह गुरु-शिष्य तबला जुगलबंदी केवल एक उत्कृष्ट संगीत प्रस्तुति ही नहीं रही, बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की गौरवशाली गुरु-शिष्य परंपरा को जीवंत करने वाला एक प्रेरणादायक एवं यादगार क्षण भी साबित हुई। इस प्रस्तुति ने उपस्थित संगीत प्रेमियों के मन पर अपनी अमिट छाप छोड़ी।