विशालकाय किंग कोबरा का सफल रेस्क्यू, प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ा गया।
कोरबा – 16/06/2026 के सुबह 7 बजे -पसरखेत वनक्षेत्र अंतर्गत मदनपुर बस्ती में एक कृषक की बाड़ी के समीप विशालकाय किंग कोबरा फिर दिखाई देने से क्षेत्र में लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई। इसकी सूचना वनपरिक्षेत्र अधिकारी पसरखेत को प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही वनपरिक्षेत्र अधिकारी ने वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में कार्रवाई करते हुए नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी के सर्पमित्र जितेंद्र सारथी को अवगत कराया तथा परिक्षेत्र के त्वरितप्रतिक्रिया बल (QRT)के साथ घटनास्थल पर पहुंचे।
किंग कोबरा अत्यंत दुर्लभ एवं वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-1 में शामिल प्रजाति है, इसलिए इसकी सुरक्षा और संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।रिहायशी इलाके में इसके विचरण से न केवल इस दुर्लभ प्राणी को नुकसान पहुंचने की आशंका थी, बल्कि आमजन के लिए भी खतरा उत्पन्न हो सकता था। अतः तत्काल रेस्क्यू अभियान चलाया गया।
वन एवं वन्य जीवो की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए समर्पित वन मण्डलधिकारी कोरबा श्रीमती प्रेमलता यादव के निर्देशानुसार, श्री सूर्यकांत सोनी उपवनमंडलधिकारी दक्षिण कोरबा के कुशल नेतृत्व मे सभी सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए लगभग डेढ़ घंटे की मेहनत के बाद किंग कोबरा का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया। इसके पश्चात उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जिसमें वह पूर्णतः स्वस्थ पाया गया। बाद में उसे उसके प्राकृतिक आवास क्षेत्र में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया गया।
ज्ञातव्य हो कि पसरखेत एवं आसपास के वन क्षेत्रों में इस प्रजाति के सांप पर्याप्त संख्या में पाए जाते हैं। किंग कोबरा खाद्य श्रृंखला का शीर्ष शिकारी है और मुख्य रूप से अन्य सांपों का भक्षण करता है। इस कारण यह पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है तथा अनेक हानिकारक जीवों की संख्या को नियंत्रित करने में सहायक होता है, इसलिए इनके संरक्षण के लिए एवं रेस्क्यु के लिए तत्काल हेल्प लाइन नंबर 8817534455, 9424167889 पर सूचना देने का आग्रह किया है।

अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) द्वारा किंग कोबरा को संकटग्रस्त प्रजातियों की सूची में रखा गया है। इनके संरक्षण के लिए वन पारिस्थितिकी तंत्र और प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है।
कोरबा वनमंडल जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध क्षेत्र है। वन विभाग एवं नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी द्वारा ग्रामीणों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। इसी जागरूकता का परिणाम है कि ग्रामीण अब सांपों को मारने के बजाय दिखाई देने पर वन विभाग को सूचना देते हैं और उनके सुरक्षित रेस्क्यू में सहयोग करते हैं। ऐसे प्रयासों से न केवल इस महत्वपूर्ण प्रजाति का संरक्षण होगा, बल्कि वन क्षेत्र की जैव विविधता को भी दीर्घकालीन लाभ प्राप्त होगा।
किंग कोबरा (ओफियोफैगस हन्ना) न केवल एक शीर्ष शिकारी है, बल्कि उष्णकटिबंधीय जैव विविधता कोबनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रजातिभी है। चूंकि ये मुख्य रूप से अन्य साँपों (विषैले साँपों सहित) को खाते हैं, इसलिए ये स्वाभाविक रूप से पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखते हैं और एक “संरक्षित प्रजाति” के रूप में कार्य करते हैं। इनके आवासों की रक्षा करना अनगिनत अन्य पौधों और जानवरों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।हाल ही में हुए वैज्ञानिक पुनर्वर्गीकरण से पता चला है कि किंग कोबरा वास्तव में केवल एक प्रजाति नहीं बल्किचार अलग-अलग प्रजातियों का एक समूह है:उत्तरी किंग कोबरा (ओफियोफैगस हन्ना): उत्तरी भारत, पाकिस्तान और दक्षिण पूर्व एशिया में पाया जाता है।पश्चिमी घाट किंग कोबरा (ओफियोफैगस कलिंगा): दक्षिण-पश्चिमी भारत में पाया जाता है।सुंडा किंग कोबरा (ओफियोफैगस बंगरस): मलेशिया और इंडोनेशिया में पाया जाता है।लूजॉन किंग कोबरा (ओफियोफैगस साल्वाटाना): फिलीपींस में पाया जाता है।क्योंकि इन्हें आईयूसीएन द्वारा संकटग्रस्त प्रजातियोंकी सूची में रखा गया है, इसलिए इनका संरक्षण बड़े, निरंतर वन पारिस्थितिक तंत्रों की सुरक्षा पर बहुत हद तक निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, पश्चिमी घाटजैसे जैव विविधता के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में , किंग कोबरा को विशाल, अबाधित क्षेत्रों की आवश्यकता होती है, जो पूरे जंगलों को लकड़ी काटने और कृषि विकास से बचाने में मदद करता है।

