बालको की स्वास्थ्य पहल: मोबाइल वैन और प्रोजेक्ट आरोग्य से चमकी ग्रामीणों की सेहत; 1.2 लाख लोगों तक पहुंचीं चिकित्सा सेवाएं
- 70 गांवों में हर पखवाड़े पहुंच रही मोबाइल हेल्थ वैन, 40 तरह की जांचें मौके पर; 27 हजार से अधिक ग्रामीणों को मिला सीधा लाभ
बालकोनगर, ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना आज भी एक बड़ी चुनौती है। ऐसे दूरदराज के इलाकों में, जहां कभी इलाज के लिए लोगों को मीलों का सफर तय करना पड़ता था, वहां भारत बालको की मोबाइल हेल्थ वैन (एमएचवी) और प्रोजेक्ट आरोग्य संजीवनी साबित हो रहे हैं। इन अनूठी पहलों के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2026 में क्षेत्र के लगभग 1.2 लाख लोगों को उनके घर के पास ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला है।बदलती स्वास्थ्य जरूरतों को देखते हुए बालको की मोबाइल हेल्थ वैन में अब फिजियोथेरेपी और आधुनिक प्रयोगशाला जांच की सुविधाएं भी जोड़ दी गई हैं। वैन के माध्यम से मौके पर ही 40 से अधिक प्रकार के ब्लड व अन्य टेस्ट किए जा रहे हैं, जिससे बीमारियों की समय पर पहचान और त्वरित इलाज संभव हो पा रहा है।
पाड़ीमार की 60 वर्षीय फूलमणि एक्का बीते कई सालों से जोड़ों के गंभीर दर्द (गठिया) से पीड़ित थीं। दर्द के कारण उनका चलना-फिरना और अस्पताल तक पहुंचना दूभर हो गया था। फूलमणि ने बताया कि आर्थिक तंगी और शारीरिक लाचारी के कारण बाहर जाकर इलाज कराना मुमकिन नहीं था। लेकिन जब से बालको की मोबाइल हेल्थ वैन हमारे गांव आने लगी, मुझे घर के आंगन में ही डॉक्टरों की सलाह और दवाइयां मिलने लगीं। अब हर विजिट पर मुझे फिजियोथेरेपी और सही एक्सरसाइज की गाइडेंस भी मिलती है।
प्रोजेक्ट आरोग्य मुख्य रूप से कम्युनिटी बेस्ड और प्रिवेंटिव (निवारक) हेल्थ केयर पर काम करता है। इसके तहत स्वास्थ्य शिविर और जागरूकता अभियानों के जरिए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा एनीमिया नियंत्रण, कुपोषण मुक्ति के लिए माताओं को विशेष प्रशिक्षण,टीबी, एचआईवी और नशामुक्ति जैसे गंभीर विषयों पर लगातार काउंसिलिंग शामिल है।इस प्रोजेक्ट ने अकेले वित्तीय वर्ष 2026 में 93 हजार से अधिक लोगों को जागरूक और लाभान्वित किया है। कोरबा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एसएन केशरी ने बालको के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में सरकारी स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने में बालको जैसे उद्योग हमारे बड़े सहयोगी हैं। प्रोजेक्ट आरोग्य और मोबाइल वैन के जरिए स्वास्थ्य सेवाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही हैं, जिससे स्वास्थ्य सूचकांकों में बड़ा सुधार देखने को मिल रहा है।बालको की यह पहल केवल फौरी राहत या मुफ्त दवा बांटने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में ‘प्रिवेंटिव हेल्थकेयर’ (बीमारी से पहले बचाव) और आत्मनिर्भर स्वास्थ्य मॉडल को विकसित कर रही है, जो एक स्वस्थ समाज की बुनियाद है।

सही पोषण मार्गदर्शन से 2 महीने में सामान्य श्रेणी में आई काव्या
प्रोजेक्ट आरोग्य न सिर्फ इलाज बल्कि कुपोषण और एनीमिया के खिलाफ भी जंग लड़ रहा है। बालकोनगर के पास की निवासी नेहा कंवर बताती हैं कि उनकी ढाई साल की बेटी काव्या का वजन महज 11 किलो था। प्रोजेक्ट आरोग्य से जुड़ने के बाद मिले पोषण परामर्श के आधार पर उन्होंने काव्या के खान-पान में बदलाव किए। इसका असर यह हुआ कि सिर्फ दो महीनों में बच्ची का वजन 1.5 किलो बढ़ गया और वह कुपोषण के दायरे से बाहर आ गई।

